वीर देओला दादा की कहानी और इतिहास
वीर देओला दादा की कहानी और इतिहास :
जन्म और परिवार : देओला दादा का जन्म 1611 ईस्वी (17वीं शताब्दी) में हुआ था। उनके पिता का नाम राम सिंह पिलानिया और माता का नाम राज कौर था।
वीरगाथा (गौ-रक्षा) : देओला दादा ने अपने भाइयों के साथ मिलकर गुजरी लीलावती की गायों की रक्षा के लिए कसाइयों/हमलावरों से भयंकर युद्ध किया।
बलिदान : अपनी मातृभूमि और गौ-वंश की रक्षा करते हुए, मात्र 32 वर्ष की अल्पायु में, 1643 ईस्वी में उन्होंने वीरगति प्राप्त की।
प्रतीक: उनकी घोड़ी का नाम 'रामप्यारी' बताया जाता है, जो उनके युद्ध कौशल और वीरता का प्रतीक है।
स्थान और मंदिर : वीर देओला दादा का मुख्य मंदिर झोझू कलां (हरियाणा में स्थित) में है। पिलानिया जाट गोत्र में उन्हें श्रद्धेय लोक देवता के रूप में पूजा जाता है।
लोक धारणा : मान्यता है कि उन्होंने अन्यायी ताकतों के खिलाफ अपनी जान दी और आज भी अपनी कौम और गौ-वंश के रक्षक के रूप में पूजे जाते हैं।